Thursday, June 19, 2014

आय के आठ प्रकार


कभी कभी कई स्थान पर  हमें शांति  का अनुभव होता है वह स्थान  एक सामान्य घर होता है। और कई स्थान पर  सब प्रकार की सुविधा होने पर भी शांति का अहसास नहीं होता। नई जगह रहने से  किसी का भाग्योदय होता है तो   किसी को हानि होती है।
इस लिए नये स्थान पर जाने से पूर्व उस स्थान की ऊर्जा का निर्णय करना चाहिए. ।
कभी कभी एक छोटा सा परिवर्तन भी भाग्योदय करने के लिए सहायक हो सकता है.

घर और घरमालिक  की कुंडली का मेलापक करना चाहिए  है. प्रत्येक घर का आय ,व्यय ,राशि,नक्षत्र ,लग्न ,तारा आदि  निर्णय करना चाहिए। घर का क्षेत्रफल तथा घर मालिक का हस्तगत प्रमाण के आधार से लेनदेन का निर्णय किया जाता है.
.
आय के आठ प्रकार के होते हैं.

1. ध्वज आय  - प्रसिद्धि
2 धूम आय -. शोक
3.सिंह  आय  - जय
४ श्वान  आय -. शत्रु भय
५ . वृष  आय -  धन प्राप्ति
६. खर आय - दरिद्रता
७  गज आय  -सुख प्राप्ति
8 उष्ट्र  आय -. रोग भय
हमेशा आय व्यय से ज्यादा होनी चाहिए. आय से  मुख्य दरवाजे की दिशा  निर्धारित कर  सकते  है. आय व्यय से ज्यादा हो तो  जीवन के अधिक आर्थिक उन्नति होती है .
गृह की कुंडली का निर्माण करने के लिए सही व्यक्ति का मार्गदर्शन ले।

पूर्व में वास्तुकला - प्रवाह में उत्तर Positiva ऊर्जा पूजा कक्ष, एक अध्ययन कक्ष, पानी की टंकी, वास्तुकला अधिक शुभ हो जाता अग्रणी की दिशा में है.
पश्चिम -. दक्षिण एक अच्छा फल प्राप्त करने की शुरुआत कर रहे हैं एक बिस्तर, सीढ़ी, स्टोर रूम के लिए नकारात्मक ऊर्जा कक्ष के प्रवाह में है.
स्थान निर्धारित करने के लिए नक्शे के केंद्र में सभा के लिए सबसे पहले घर की ऊर्जा तो उत्तर द्वारा निर्मित कम्पास -. दक्षिण लाइन और ईस्ट - ऊर्जा दृढ़ संकल्प की वास्तुकला में वेस्ट लाइन निशान बनाया जा सकता है.
 जगह की वास्तुकला की ऊर्जा निर्धारित किया जा सकता है.
घर - कुछ प्रयोग होने की Positiva (सकारात्मक) ऊर्जा काम करने के लिए.
* संघर्ष से घर - खुद करने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक नियमित आधार पर uccata नमक.
शौचालय में हैं -. बाथरूम में negativa ऊर्जा * क्योंकि Samundari नमक और बाथरूम में डाल परिवर्तित किया जाना चाहिए.
* क्योंकि कम ऊर्जा के घर रखने के लिए रात में कपड़े बाहर सूख Positiva. घर की Phangsui purusavarga है और आर्थिक मामलों में अधिक काम करते हैं.
* लक्ष्मी vasali स्थापित करने के लिए घर के मुख्य गेट खुश है.
* पूर्व में तुलसी के पौधे - उत्तर - पूर्व दिशा में होना चाहिए, अधिक बगीचे से सांप के साथ ध्यान में रखते हुए dhanagamana भी हैं.
* Mukhyadvara पर svatika नामांकन की बुराई तत्व से और साथ ही हस्ताक्षर करने की कोशिश नहीं करता.

भाग्योदय devikrpa से, कड़ी मेहनत से, पृथ्वी से, आप आसपास के वातावरण में परिवर्तन. गीता में कहा है बनाने के लिए है अर्थ ...
 "अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्.
   विविधाकश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पचमम् .. "
 .

Tuesday, January 14, 2014

Agni disha ka mahatva


कभी कभी कई स्थान पर  हमें शांति  का अनुभव होता है वह स्थान  एक सामान्य घर होता है। और कई स्थान पर  सब प्रकार की सुविधा होने पर भी शांति का अहसास नहीं होता। नई जगह रहने से  किसी का भाग्योदय होता है तो   किसी को हानि होती है।
इस लिए नये स्थान पर जाने से पूर्व उस स्थान की ऊर्जा का निर्णय करना चाहिए. ।
कभी कभी एक छोटा सा परिवर्तन भी भाग्योदय करने के लिए सहायक हो सकता है.

घर और घरमालिक  की कुंडली का मेलापक करना चाहिए  है. प्रत्येक घर का आय ,व्यय ,राशि,नक्षत्र ,लग्न ,तारा आदि  निर्णय करना चाहिए। घर का क्षेत्रफल तथा घर मालिक का हस्तगत प्रमाण के आधार से लेनदेन का निर्णय किया जाता है.
.
आय के आठ प्रकार के होते हैं.

1. ध्वज आय  - प्रसिद्धि
2 धूम आय -. शोक
3.सिंह  आय  - जय
४ श्वान  आय -. शत्रु भय
५ . वृष  आय -  धन प्राप्ति
६. खर आय - दरिद्रता
७  गज आय  -सुख प्राप्ति
8 उष्ट्र  आय -. रोग भय
हमेशा आय व्यय से ज्यादा होनी चाहिए. आय से  मुख्य दरवाजे की दिशा  निर्धारित कर  सकते  है. आय व्यय से ज्यादा हो तो  जीवन के अधिक आर्थिक उन्नति होती है .
गृह की कुंडली का निर्माण करने के लिए सही व्यक्ति का मार्गदर्शन ले।

पूर्व में वास्तुकला - प्रवाह में उत्तर Positiva ऊर्जा पूजा कक्ष, एक अध्ययन कक्ष, पानी की टंकी, वास्तुकला अधिक शुभ हो जाता अग्रणी की दिशा में है.
पश्चिम -. दक्षिण एक अच्छा फल प्राप्त करने की शुरुआत कर रहे हैं एक बिस्तर, सीढ़ी, स्टोर रूम के लिए नकारात्मक ऊर्जा कक्ष के प्रवाह में है.
स्थान निर्धारित करने के लिए नक्शे के केंद्र में सभा के लिए सबसे पहले घर की ऊर्जा तो उत्तर द्वारा निर्मित कम्पास -. दक्षिण लाइन और ईस्ट - ऊर्जा दृढ़ संकल्प की वास्तुकला में वेस्ट लाइन निशान बनाया जा सकता है.
 जगह की वास्तुकला की ऊर्जा निर्धारित किया जा सकता है.
घर - कुछ प्रयोग होने की Positiva (सकारात्मक) ऊर्जा काम करने के लिए.
* संघर्ष से घर - खुद करने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक नियमित आधार पर uccata नमक.
शौचालय में हैं -. बाथरूम में negativa ऊर्जा * क्योंकि Samundari नमक और बाथरूम में डाल परिवर्तित किया जाना चाहिए.
* क्योंकि कम ऊर्जा के घर रखने के लिए रात में कपड़े बाहर सूख Positiva. घर की Phangsui purusavarga है और आर्थिक मामलों में अधिक काम करते हैं.
* लक्ष्मी vasali स्थापित करने के लिए घर के मुख्य गेट खुश है.
* पूर्व में तुलसी के पौधे - उत्तर - पूर्व दिशा में होना चाहिए, अधिक बगीचे से सांप के साथ ध्यान में रखते हुए dhanagamana भी हैं.
* Mukhyadvara पर svatika नामांकन की बुराई तत्व से और साथ ही हस्ताक्षर करने की कोशिश नहीं करता.

भाग्योदय devikrpa से, कड़ी मेहनत से, पृथ्वी से, आप आसपास के वातावरण में परिवर्तन. गीता में कहा है बनाने के लिए है अर्थ ...
 "अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्.
   विविधाकश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पचमम् .. "
 .

Monday, January 13, 2014

Ishan disha..........vastu shastra se

आज ईशान कोण  के बारे में जानेगे। … इशान कोण पूर्व ओर  उत्तर  के  
 बिच  का कोण। .... इशान  दिशा का स्वामी है रूद्र आयुध,त्रिशूल। …गुरु ग्रह  का प्रभाव भी विशेष देखने को मिलता है।  कुंडली में दूसरे और तीसरे स्थान का निरूपण भी ईशान कोण से देखा जा सकता है ,
अर्थात यह कोण पवित्र है अत: या दिशा सर्वदा स्वच्छ  रखनी चाहिए। 

*इस दिशा में मोटा हॉल अथवा गैलरी हो तो शुभ कहते है। किन्तु टॉयलेट इस दिशा में कुल नाश करता है।        
 संतान  का प्रस्न एवं  गृह क्लेश रहता है। 
*यदि यह दिशा कम होती है तो संतान कि प्राप्ति होती नहीं या फिर संतान विकलांग या अल्पायु होता है। 
*ईशान दिशा निचा  हो तो स्वामी को सुख -सम्पति एवं धनलाभ होता है। 
*मगर ईशान दिशा वास्तु दोष हो या नैऋत्य कोण निचा हो तो हेल्थ एवं चारित्र्य  के प्रश्न  होते है। 
*अंडर ग्राउंड टैंक ,tube वेल ,कुँवा  ईशान कोण में होने से आर्थिक सम्पति  बढता है। किन्तु यहाँ पानी का रोटेशन होना भी जरुरी है। 
*कुँवा  सदा गोलाकार होना चाहिए। 
*ईशान कोण देवस्थान के लिए उत्तम है। पूजा में बेठे हुए व्यक्ति का चेहरा पूर्व की ओर  होना चाहिए।
*ऑफिस में ईशान में प्रवेश ,देव कि मूर्ति,वाटरकूलर ,मंदिर,विजिटिंग रूम,खुली जगह  रखना  शुभ  होता  है। 
*ईशान कोण सदा शुद्ध एवं पवित्र रखना चाहिए। 

*दोष निवारण के लिए नियोन कि लाइट लगा सकते है। शिवा महिम्न स्तोत्र एवं सोमवार का व्रत शुभत्व देता है। 
*घर के मुख्य दरवाजे पर त्रिशूल,ॐ ,स्वस्तिक  लगाने से गृह स्वामी के अधूरे कार्य पूर्ण हो जाते है। 
*प्रात: मुख्य दरवाजे के आगे एक गिलास पानी डालने से गृह में सपन्नता एवं शांति बनी रहती है। 



Sunday, December 15, 2013

purva me vastu ka mahtva


पूर्व दिशा में वास्तु 

पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है। विज्ञान कि दृस्टि  से सवार के सूर्य के किरणे सौम्य एवम शारीर के लिए पौषक करता है। वास्तु में पूर्व डिश में मुख्य दरवाजा हो तो सुभा कहते है। पूर्व दिशा अग्नितत्व कि परिचायक होने के कारन शुभ कार्य करना चाहिए।  
पूर्व दिशा में अंडरग्राउंड टैंक ,कुवा ,बोरिंग,या जल का स्तोत्र हो तो शुभ फल मिलता है।  कौटुंबिक समृध्धि दीर्घायु बनाते है। 
इस दिशा के मुख्य दरवाजा के सामने चबूतरा हो तो अशांति ,अति खर्च होता है। पूर्व का भाग हमेशा स्वच्छ होना चाहिए।यदि मकान भाड़े पे देना हो तो पूर्व का भाग कभी भी भाड़े पे देना नहीं चाहिए।  पूर्व में गैलरी या वरंडा  शुभ कहते है। पूर्व मुखी घर के सामने पूर्व में ऊँची दीवाल होना अशुभ कहते है। अत: पूर्व के दीवाल से ऊँची पश्चिम कि दीवाल होनी चाहिए। 
यदि किसी के घर में पूर्व का दरवाजा बड़ा हो,खिड़िकिया पूर्व में ज्यादा हो तो समाज लेना चाहिए के घर के मालिक सिंह राशि या सिंह लग्न का प्रभुत्व होगा। 
पूर्व से पश्चिम तक फेला हुआ घर को सूर्य वेधी  केहेते है। जब कि उत्तर से दक्षिण कि और फेला हुआ घर को चन्द्र विधि केहते है। 
शॉप, ऑफिस ,फैक्टरी  के मालिक को पूर्व या उत्तर कि ओर  मुंह करके बैठना अच्छा है। 
व्यापर-फैक्टरी  में पूर्वदिशा में लॉन के गार्डन ,साइकिल स्टैण्ड इत्यादि रखना शुभ कहते है। 
ऐसे अग्निकोण में रसोईघर शुभ कहते है पर अगर ना  हो पाये तो  पूर्व में भी रसोईघर बना सकते है। डाइनिंग हॉल ,पूजा रूम ,लिब्रेअरी बाथरूम इत्यादि पूर्व दिशा में ऱख शकते है।