Sunday, December 15, 2013

purva me vastu ka mahtva


पूर्व दिशा में वास्तु 

पूर्व दिशा में सूर्योदय होता है। विज्ञान कि दृस्टि  से सवार के सूर्य के किरणे सौम्य एवम शारीर के लिए पौषक करता है। वास्तु में पूर्व डिश में मुख्य दरवाजा हो तो सुभा कहते है। पूर्व दिशा अग्नितत्व कि परिचायक होने के कारन शुभ कार्य करना चाहिए।  
पूर्व दिशा में अंडरग्राउंड टैंक ,कुवा ,बोरिंग,या जल का स्तोत्र हो तो शुभ फल मिलता है।  कौटुंबिक समृध्धि दीर्घायु बनाते है। 
इस दिशा के मुख्य दरवाजा के सामने चबूतरा हो तो अशांति ,अति खर्च होता है। पूर्व का भाग हमेशा स्वच्छ होना चाहिए।यदि मकान भाड़े पे देना हो तो पूर्व का भाग कभी भी भाड़े पे देना नहीं चाहिए।  पूर्व में गैलरी या वरंडा  शुभ कहते है। पूर्व मुखी घर के सामने पूर्व में ऊँची दीवाल होना अशुभ कहते है। अत: पूर्व के दीवाल से ऊँची पश्चिम कि दीवाल होनी चाहिए। 
यदि किसी के घर में पूर्व का दरवाजा बड़ा हो,खिड़िकिया पूर्व में ज्यादा हो तो समाज लेना चाहिए के घर के मालिक सिंह राशि या सिंह लग्न का प्रभुत्व होगा। 
पूर्व से पश्चिम तक फेला हुआ घर को सूर्य वेधी  केहेते है। जब कि उत्तर से दक्षिण कि और फेला हुआ घर को चन्द्र विधि केहते है। 
शॉप, ऑफिस ,फैक्टरी  के मालिक को पूर्व या उत्तर कि ओर  मुंह करके बैठना अच्छा है। 
व्यापर-फैक्टरी  में पूर्वदिशा में लॉन के गार्डन ,साइकिल स्टैण्ड इत्यादि रखना शुभ कहते है। 
ऐसे अग्निकोण में रसोईघर शुभ कहते है पर अगर ना  हो पाये तो  पूर्व में भी रसोईघर बना सकते है। डाइनिंग हॉल ,पूजा रूम ,लिब्रेअरी बाथरूम इत्यादि पूर्व दिशा में ऱख शकते है। 
 

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